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शनिवार, 22 जुलाई 2017

कानपुर में किराये के मकान में 12 साल रहे हैं कोविंद

राजेश कानोडिया। यह तो सच ही है कि किसी का भविष्य क्या होगा कोई नहीं कह सकता। ठीक उसी तरह से 1993 में कानपुर आकर 12 साल तक किराये के मकान में रहने वाले रामनाथ कोविंद के बारे में कोई नहीं कह सकता था कि एक दिन यह भारत का राष्ट्रपति बनेगा।

देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बनने के साथ ही कानपुर को एक साथ दो गौरव मिल गया है। यहां के डीएवी पीजी कालेज में 1946 में अटल बिहारी वाजपेयी भी एमए की पढ़ाई कर चुके  हैं। बाद में वह देश के प्रधानमंत्री बने। रामनाथ कोविंद भी यहां से बीकॉम की डिग्री हासिल कर चुके हैं। राम नाथ कोविन्द का जन्म भी कानपुर देहात की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। 

उनको जानने वाले बताते हैं कि 1993 में कानपुर आये थे और कल्याणपुर इलाके के न्यू आजाद नगर में डॉ. आदित्य नारायण दीक्षित के घर में दो कमरों में किराए पर रहते थे। डॉ. आदित्य कानपुर के क्राइस्ट चर्च कालेज में फिजिक्स के प्रोफ़ेसर थे और दो कमरों के किराए के रूप में 30 रुपए देते थे।

देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद यहां के दो कमरों में 2005 तक यहां रहे है। इसके बाद कभी कभार ही उनका परिवार यहां आता था। किराए के मकान में 12 साल रहने के बाद राम नाथ कोविंद ने कल्याणपुर इलाके में इंद्रानगर के दयानन्द विहार में अपना माकन बनवा लिया और वहां शिफ्ट हो गए।  

समय के साथ रामनाथ कोविंद राजनीति और कामकाज में मशगूल होते गए और उन्हें दिल्ली में ही ज्यादा वक्त गुज़ारना पड़ता था लेकिन कानपुर के लोगों के दिलों में उनकी अमिट छाप आज भी देखी जा सकती है। अपनी सादगी के लिए मशहूर रामनाथ कोविद ने अपने कानपुर वाले मकान को बारातशाला के रूप में दान कर दिया था। बिहार के राज्यपाल रहे रामनाथ कोविंद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके भतीजे पंकज की झींझक बाजार में एक छोटी सी कपड़े की दुकान है।

रामनाथ कोविंद कानपुर देहात परौख गांव में कोविंद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में दान कर चुके हैं। बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं। रामनाथ कोविंद इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ महामंत्री रह चुके हैं। अगस्त 2015 में बिहार के राज्यपाल के तौर पर भी उनके नाम की घोषणा अचानक ही हुई थी। कोविंद लगातार 12 वर्षों तक राज्यसभा सांसद रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे हैं।

रामनाथ कोविंद बीजेपी दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रह चुके हैं। आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई।

रामनाथ कोविंद ने कानपुर नगर के बीएनएसडी से इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीेएवी कॉलेज से बी कॉॅम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की। मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी। रामनाथ गोविंद एक साधारण परिवार से आते हैं उनके भतीजे पंकज की कानपुर देहात झींझक के पास कपड़ों की दुकान है।

रामनाथ कोविंद जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे। जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया।

बिहार के पूर्व राज्यपाल और देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दोस्त पेशे से किसान विजय पाल सिंह जिनकी उम्र इस समय करीब 71 साल है। उन्होंने रामनाथ के साथ बचपन में बिताये कुछ किस्से सुनाये। विजय पाल के मुताबिक वह कानपुर देहात के गांव परौंख में अपने परिवार के साथ रहते हैं। विजय अब अपने दोस्त से दिल्ली जाकर मिलने की इच्छा जता रहे हैं। कोविंद और विजय पाल का घर परौंख गांव में अगल-बगल ही है। कक्षा 1 से 5 तक दोनों साथ में पढ़े।

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