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रविवार, 3 सितंबर 2017

आडवाणी को गिरफ्तार करने वाले आईएएस के साथ आज बनेंगे ये कैबिनेट मंत्री…


नव-बिहार न्यूज नेटवर्क (NNN): देश के मंत्रिमंडल में रविवार को फेरबदल होना है. कई बैठकों और मंथन के लंबे दौर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट टीम के लिए 9 नये चेहरे चुने हैं. माना जा है कि मोदी ने इन्हें चुनते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा है. एक तरफ जहां अनुभवी नेताओं को जगह मिली है, तो वहीं कुछ युवा चेहरों को भी तरजीह दी गई है. आज 10.30 बजे सभी 9 लोग मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. जानिए उन सभी 9 नेताओं के बारे में, जिन्हें कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है-


राजकुमार सिंह

बिहार के आरा से लोकसभा सांसद हैं राज कुमार सिंह उर्फ आर के सिंह. संसद की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पेंशन, जन शिकायत और कानून और न्याय संबंधी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं. राजकुमार सिंह 1975 बैच (बिहार काडर) के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं. वह भारत के गृह सचिव भी रह चुके हैं. अपने शानदार करियर में आर के सिंह कई विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं. जिनमें रक्षा उत्पाद सचिव, गृह सचिव, इंडस्ट्रीज, जन कार्य और कृषि विभाग प्रमुख हैं. इन्होंने पुलिस और जेल आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन के लिए ढांचा तैयार करने के लिए में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. इसके अलावा आर के सिंह ने दिल्ली के सेंट स्टीफेन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई की है फिर कानून में बैचलर डिग्री हासिल की. वह नीदरलैंड की आरवीबी ड्वेल्फ यूनिवर्सटी से भी पढ़ाई कर चुके हैं. बता दें कि आरके सिंह वही आईएएस हैं, जिन्होंने रामलहर के रथ पर सवार लालकृष्ण आडवाणी को 30 अक्टूबर 1990 को गिरफ्तार किया था. बता दें आर के सिंह उस वक्त समस्तीपुर के डीएम थे.

अश्विनी चौबे

बिहार के बक्सर से लोकसभा सांसद हैं अश्विनी कुमार चौबे. ऊर्जा पर स्टैंडिंग कमिटी और संसदीय एस्टीमेट कमिटी के सदस्य. बिहार विधानसभा में लगातार 5 बार विधायक रहे. बिहार में 8 साल तक स्वास्थ्य, शहरी विकास और जनस्वास्थ्य, इंजीनियरिंग जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली.

पटना यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे चौबे, जेपी आंदोलन में भी सक्रिय रहे. मीसा कानून के तहत जेल भेजे गए. चौबे ने ‘घर-घर में हो शौचालय का निर्माण, तभी होगा बिटिया का कन्यादान’ का नारा दिया था और 11,000 महादलित परिवारों में शौचालय का निर्माण कराया. चौबे ज़ूऑलजी में स्नातक हैं और योग में विशेष रुचि रखते हैं.

सत्यपाल सिंह

उत्तर प्रदेश के बागपत से लोकसभा सांसद हैं. सिंह आंतरिक मामलों पर बनी संसदीय स्थाई समिति के सदस्य हैं और ऑफिसेज ऑफ प्रॉफिट पर बनी जॉइंट कमिटी के चेयरपर्सन हैं. सत्यपाल सिंह महाराष्ट्र कैडर से 1980 बैच के आईपीएस हैं. इन्हें 1990 के दौर में मध्यप्रदेश और आंध्र प्रदेश में नक्सली इलाकों में काम करने के लिए भारत सरकार की ओर से 2008 में में आंतरिक सुरक्षा सेवा मेडल से भी नवाजा गया है. सत्यपाल सिंह मुंबई, पुणे और नागपुर के पुलिस कमिश्नर भी रहे हैं. 1990 में मुंबई में तेजी से बढ़ रहे संगठित अपराध की कमर तोड़ने का श्रेय भी इन्हें जाता है.

सत्यपाल सिंह बेस्ट सेलिंग बुक्स भी लिख चुके हैं, जिनमें कुछ जनजातीय संघर्ष और नक्सलवाद पर आधारित हैं. सत्यपाल वैदिक अध्ययन और संस्कृत के जानकार हैं, और भ्रष्टाचार, धार्मिक सद्भाव और आध्यात्म जैसे विषयों पर इनकी अच्छी पकड़ है. इनका जन्म बागपत के बसौली गांव में हुआ था। इन्होंने रासायन विज्ञान में एमएससी और एमफिल किया है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से रणनीतिक प्रबंधन में एमबीए भी कर चुके हैं, साथ ही पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए और नक्सलवाद में पीएचडी कर चुके हैं.

शिव प्रताप शुक्ला

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. ग्रामीण विकास पर संसद की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य. 1989 से 1996 तक लगातार चार बार विधायक रहे. यूपी सरकार में आठ साल तक कैबिनेट मंत्री रहे। ग्रामीण विकास, शिक्षा और जेल सुधार को लेकर किए गए अपने काम के लिए जाने जाते हैं. गोरखपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. 1970 के दशक में छात्र नेता के तौर पर राजनीति में शुरुआत की. आपातकाल के दौरान 19 महीने जेल में बंद रहे.


गजेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान के जोधपुर से लोकसभा सांसद हैं. वह वित्त मामलों पर बनी संसदीय समिति के सदस्य हैं और फेलोशिप कमिटी के चेयरमैन हैं. तकनीक-प्रेमी और प्रगतिशील किसान के रूप में वह ग्रामीण समाज के लिए एक आदर्श हैं. वह अपनी साधारण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं. वह क्वोरा (सवाल-जवाब की विख्यात ब्लॉगिंग साइट) पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनेताओं में शामिल हैं. सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता युवाओं से उनके जुड़ाव का उदाहरण है. खेलों के शौकीन, गजेंद्र सिंह शेखावत, राष्ट्रीय और विश्वविद्यालय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके हैं. वह फिलहाल ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ स्पोर्ट्स के सदस्य हैं. इसके साथ ही वह बास्केटबॉल इंडिया प्लेयर्स असोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी से फिलॉस्फी में एमए और एमफिल किया है.

अनंत कुमार हेगड़े

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ से सांसद हैं. हेगड़े एक्सटर्नल अफेयर और एचआरडी पर बनी पार्ल्यामेंट स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं. हेगड़े पहली बार 28 साल की उम्र में सांसद बने थे. यह संसद में उनका पांचवा टर्म है. अपने सांसदीय कार्यकाल के दौरान हेगड़े कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं. इन समितियों में वित्त, गृह, मानव संसाधन, वाणिज्य कृषि और विदेश विभाग शामिल हैं. हेगड़े चार बार स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया के सदस्य भी रहे हैं. ग्रामीण भारत पर गहरी जानकारी के साथ, अनंत कुमार कदंम्ब नाम के एनजीओ (गैर सरकारी संस्था) के संस्थापक भी रहे हैं. कदम्ब ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, रूरल मार्केटिंग और दूसरे कई क्षेत्रों में काम करता है. हेगड़े कोरियन मार्शल आर्ट ताइक्वांडो के भी जानकार हैं.

अल्फोंज कन्ननाथनम

अल्फोंज कन्ननाथनम, केरल काडर के 1979 बैच के जाने माने पूर्व आईएएस ऑफिसर हैं. अल्फोंज एक वकील भी हैं. डीडीए के कमिश्नर के तौर पर उन्होंने 15,000 अवैध इमारतों का अतिक्रमण हटाया, जिसके बाद वह दिल्ली के डिमॉलिशन मैन के रूप में प्रसिद्ध हो गए. 1994 में टाइम मैगजीन ने विश्व के 100 युवा ग्लोबल लीडर्स की सूची में भी अल्फोंज को शामिल किया. अल्फोंज का जन्म कोयट्टम जिले के मणिमाला नामक एक ऐसे गांव में हुआ था जहां बिजली तक नहीं थी. जिला कलेक्टर के रूप में उन्होंने भारत के पहले साक्षरता आंदोलन का बीड़ा उठाया और 1989 में कोयट्टम को भारत का पहला 100 प्रतिशत साक्षर टाउन बनाकर दिखाया. अल्फोन्स ने 1994 में जनशक्ति नाम का एक एनजीओ बनाया जो नागरिकों के प्रति सरकार की जवाबदेही को लेकर लोगों में विश्वास लाने का काम करता है. आईएएस से रिटायर होने के बाद अल्फोन्स केरल के कन्जिराप्पल्ली से निर्दलीय विधानसभा सदस्य चुने गए. वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2017 का फाइनल ड्राफ्ट बनाने वाली समिति के भी सदस्य रहे. अल्फोन्स ने ‘मेकिंग अ डिफरेंस’ नामक पुस्तक भी लिखी है, जो बेस्टसेलिंग किताब बनी.

हरदीप सिंह पुरी

हरदीप सिंह पुरी, 1974 के बैच के पूर्व भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के अधिकारी रह चुके हैं. पुरी को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों का जानकार माना जाता है. हरदीप पुरी पूर्व में विकासशील देशों के रिसर्च एंड इंफोर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) थिंक टैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा वह न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (आईपीआई) के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. हरदीप पुरी का विदेशों में बहुपक्षीय क्षेत्रों में भारतीय कूटनीति के लिए राजनयिक स्तर पर और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधित्व के तौर पर पिछले 4 दशकों में अहम योगदान रहा है. इसके अलावा पुरी ने ब्राजील और ब्रिटेन में भी राजनयिक सेवाएं दी हैं. वह जिनेवा में भी भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे हैं. इसके अलावा पुरी ने संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के हेड के तौर पर भी काम किया है. इसके अलावा वह सुरक्षा परिषद में काउंटर-टेररेजम कमिटी के अध्यक्ष भी रहे हैं. हरदीप पुरी के छात्र जीवन की बात करें तो वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पढ़े. अपने समय में वह छात्र नेता भी रहे और जेपी आंदोलन का हिस्सा भी रहे. आईएफएस में आने से पहले उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज में अध्यापन का कार्य भी किया.


वीरेंद्र कुमार, लोकसभा सांसद, टीकमगढ़

दलित समुदाय से आते हैं. मध्य प्रदेश के वीरेंद्र कुमार 6 बार से लोकसभा सदस्य हैं. श्रम मामलों पर संसद की स्थायी समिति के चेयरमैन रह चुके हैं. लेबर एंड वेलफेयर और एससी-एसटी वेलफेयर कमिटी के सदस्य भी रहे हैं. 70 के दशक में जेपी आंदोलन से जुड़े रह चुके हैं. आपातकाल के दौरान मीसा के तहत 16 महीने के लिए जेल में बंद रहे थे. छात्रों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे हैं. अनाथ बच्चों और बुजुर्ग लोगों (ओल्ड एज होम) के लिए लंबे अरसे से काम करते रहे हैं. बेहतरीन ऐकडेमिक करियर रहा है. इकनॉमिक्स में एमए और चाइल्ड लेबर में पीएचडी कर चुके हैं.

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