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शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

नवमी पर बाल विवाह मुक्त तो दशमी पर दहेज दानव रूपी रावण को जलाने का संकल्प

नव-बिहार न्यूज नेटवर्क, पटना: इस साल नवरात्र के मौके पर बिहार के लोगों से नवमी पर बाल बिवाह मुक्त बिहार तो दशमी पर रावण दहन के साथ दहेज रूपी दावन के दहन करने के संकल्प की अपील की गई है। बता दें कि पिछले दिनों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के लोगों से दहेज मुक्त बिहार बनाने की अपील कर रहे थे। माना जा रहा है कि बिहार सरकार शराबबंदी के बाद इन दो सामाजिक समस्याओं के बारे में कोई ठोस कदम उठा सकती है। 

बाल विवाह के मामले में टॉप के राज्यों के अपना राज्य बिहार शुमार है। सूबे के शहर हों या गांव, बाल विवाह की कुरीति आज भी कायम है। अखिल भारतीय औसत से तकरीबन 10% ज्यादा । राज्य के शहरों में 27% तो गांवों में 41% बेटियों के हाथ 18 की उम्र के पहले ही पीले कर दिए जा रहे हैं। तकरीबन यही औसत 21 साल की उम्र पूरा करने से पहले ब्याहे जाने वाले लड़कों का भी है। यह कुरीति मातृ, शिशु मृत्यु दर को  बढ़ाती है।

बिहार में 100 में 40 बेटियों का बाल-विवाह

बेटी बड़ी होगी तो दहेज ज्यादा लगेगा। छोटी उम्र में छोटा दहेज। गया व वैशाली में हुए एक सर्वे के नतीजे यही बताते हैं। गांव की बच्चियां जल्द स्कूल छोड़ देती हैं और फिर कच्ची उम्र में ही विवाह के दुष्चक्र में फंस जाती है। कम उम्र में शादी के कारण जल्दी और ज्यादा बच्चे पैदे होते हैं। मां बनने से जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। बाल और मातृ मृत्यु दर बढ़ती है। पीढ़ी दर पीढ़ी कुरीति, गरीबी स्थानांतरित होती रहती है। घरेलू हिंसा दर में बढोत्तरी की वजह भी बाल विवाह ही है।

 

- 43.2% महिलाएं यौन हिंसा की शिकार।
- 49.6% महिलाएं ही बिहार में है साक्षर।
- 39% बाल विवाह प्रचलित है बिहार के ग्रामीण व शहरी समाज में।
- 58% शादी-शुदा महिलाएं 19 साल की उम्र में गर्भवती हो जाती हैं।
- सुपौल, मधेपुरा, जमुई और बेगूसराय बाल-विवाह के बदनुमा दाग वाले जिले हैं। वैसे प्रचलन सभी जिलों में है।

 

दहेज के दानव का दहन है जरुरी...

दहेज हत्या के मामले में देश में बिहार का स्थान यूपी के बाद दूसरा है। यह तब है जबकि दहेज के खिलाफ कानून बनाने वाला आजाद भारत में बिहार पहला राज्य था। 1950 में ही राज्य ने दहेज निरोध कानून लागू किया। 1961 में संसद द्वारा पारित दहेज कानून के 11 साल पहले यह कानून आया। शुरुआती चिंतन के बावजूद स्थितियां विकट हैं। पिछले साल 896 बेटियां दहेज के लिए मार दी गईं।

 

पिछले साल हमने खोई 896 बेटियां

तस्वीर भयावह है हालांकि, दो वर्षों में दहेज उत्पीड़न के मामलों में कमी आई है। खगड़िया और पटना रेल जिला में 2015-16 की तुलना में 2016-17 में 75% तक, अररिया में 55 और शेखपुरा में 50% कमी आई है। वहीं 9 जिले ऐसे हैं, जहां ऐसे मामले बढ़े हैं। शिवहर जिले में दहेज उत्पीड़न के मामले में सर्वाधिक 67% वृद्धि हुई है। इसके बाद मुंगेर जिला है जहां 60%, नवगछिया (पुलिस जिला) और लखीसराय जिला में 50 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

- अप्रैल 2015 से फरवरी 2016 तक 1067 हत्या
- अप्रैल 2016 से फरवरी 2017 तक 896 हत्या

 

- 15%  मुकदमे दहेज हत्या के अकेले बिहार में दर्ज हुए पिछले साल

- 1867 दहेज निषेध कानून के तहत मुकदमे दर्ज हुए पिछले साल

- तिरहुत प्रमंडल के सारण, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में सर्वाधिक मामले सामने आए।

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