धन्यवाद

*** *** नवगछिया समाचार अब अपने विस्तारित स्वरूप "नव-बिहार समाचार" के रूप मे प्रसारित हो रहा है, आपके लगातार सहयोग से ही पाठकों की संख्या लगातार बढ़ते हुए 10 लाख को पार कर चुकी है,इसके लिए आपका धन्यवाद। *** नव-बिहार समाचार के इस चैनल में अपने संस्थान का विज्ञापन, शुभकामना संदेश इत्यादि के लिये संपर्क करें राजेश कानोडिया 9934070980 *** ***

सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

छठ या षष्‍ठी देवी की पूजा की शुरुआत कैसे? पुराण की कथा क्‍या है?

राजेश कानोडिया/ अमरेश सौरभ

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत और इसकी पौराणिक कथा के बारे में जिज्ञासा स्‍वाभाविक है, क्‍योंकि इस लोक महापर्व का फैलाव देश के कई भागों तेजी से होता जा रहा है.

इस व्रत में सूर्य देवता के साथ-साथ षष्‍ठी देवी की भी पूजा की जाती है. षष्‍ठी देवी को ही स्‍थानीय बोली में छठ मैया कहा गया है.

षष्‍ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा गया है, जो नि:संतानों को संतान देती हैं और सभी बालकों की रक्षा करती हैं. आज भी देश के बड़े भाग में बच्‍चों के जन्‍म के छठे दिन षष्‍ठी पूजा या छठी पूजा का चलन है.

षष्‍ठी देवी की पूजा की शुरुआत कैसे हुई, इस बारे में पुराण में एक कथा है. ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, यह कथा इस तरह है:

प्रथम मनु स्‍वायम्‍भुव के पुत्र थे प्रियव्रत. राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी, इसके कारण वह दुखी रहते थे. एक बार उन्‍होंने म‍हर्षि कश्‍यप से संतान का सुख मिलने का उपाय पूछा.

महर्षि कश्‍यप ने राजा से पुत्रेष्‍ट‍ि यज्ञ कराने को कहा. राजा ने यज्ञ कराया, जिसके बाद उनकी महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्‍म दिया. लेकिन दुर्योग से वह शिशु मरा पैदा हुआ था. यह देखकर राजा शोक में डूब गए. राजा के दुख से उनके परिजन और अन्‍य लोग भी आहत हो गए.

तभी एक चकित करने वाली घटना घटी. आकाश से एक सुंदर विमान उतरा, जिससे एक दिव्‍य नारी प्रकट हुईं. जब राजा ने उनसे प्रार्थना की, तब उस देवी ने अपना परिचय दिया, ‘’मैं ब्रह्मा की मानसपुत्री षष्‍ठी देवी हूं. मैं विश्‍व के सभी बालकों की रक्षा करती हूं. नि:संतानों को संतान देती हूं.’’

इसके बाद देवी ने मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया. देवी की इस कृपा से राजा बहुत खुश हुए. उन्‍होंने षष्‍ठी देवी की स्‍तुति की.

देवी ने राजा प्रियव्रत को अपने राज्‍य में ऐसी व्‍यवस्‍था करने को कहा, जिससे प्रजा भी इस पूजा के बारे में जान सके और इसे करके सुफल पा सके. इसके बाद राजा हर महीने शुक्‍लपक्ष की षष्‍ठी तिथि को षष्‍ठी देवी की पूजा करवाने लगे.


ऐसी मान्‍यता है कि इसके बाद ही धीरे-धीरे हर ओर इस पूजा का प्रचार-प्रसार हो गया.

नदी किनारे सूर्यषष्‍ठी व्रत की तैयारी करती महिलाएं

स्‍कंदपुराण में राजा के नीरोग होने की कथा

स्‍कंदपुराण में भी षष्‍ठी व्रत के बारे में एक कथा मिलती है. इस पुराण के अनुसार, नैमिषारण्‍य में शौकन आदि मुनियों के पूछने पर सूतजी कथा कहते हैं.

एक राजा थे, जो कि कुष्‍ठ रोग से ग्रस्‍त थे. उन्‍हें अपना राज्‍य भी छोड़ना पड़ गया था, जिससे वे अभाव में जी रहे थे. एक ब्राह्मण उस राजा को इस व्रत के बारे में बताते हैं. व्रत करके राजा निरोग हो जाते हैं, साथ ही अपना राज्‍य भी पा लेते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

CURRENT NEWS

ताजा समाचार प्राप्त करने के लिये अपना ई मेल पता यहाँ नीचे दर्ज करें

संबन्धित समाचार

आभारनवगछिया समाचार आपका आभारी है। आपने इस साइट पर आकर अपना बहुमूल्य समय दिया। आपसे उम्मीद भी है कि जल्द ही पुनः इस साइट पर आपका आगमन होगा।

Translatore

आभार

नवगछिया समाचार में आपका स्वागत है| नवगछिया समाचार के लिए मील का पत्थर साबित हुआ 24 नवम्बर 2013 का दिन। यह वही दिन है जिस दिन नवगछिया अनुमंडल की स्थापना हुई थी 1972 में। यह वही दिन है जिस दिन आपके इस चहेते नवगछिया समाचार ई-पेपर के पाठकों की संख्या लगातार बढ़ कर दो लाख हो गयी। नवगछिया, भागलपुर के अलावा बिहार तथा भारत सहित 54 विभिन्न देशों में नवगछिया समाचार के लगातार बढ़ते पाठकों का बहुत बहुत आभार | जिनके असीम प्यार की बदौलत नवगछिया समाचार के लगातार बढ़ते पाठकों की संख्या 20 मई 2013 को एक लाख के पार हुई थी। जो 24 नवम्बर 2013 को दो लाख के पार हो गयी थी । अब छः लाख सत्तर हजार से भी ज्यादा है। मित्र तथा सहयोगियों अथवा साथियों को भी इस इन्टरनेट समाचार पत्र की जानकारी अवश्य दें | आप भी अपने क्षेत्र का समाचार मेल द्वारा naugachianews@gmail.com पर भेज सकते हैं।