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सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

पत्रकारिता निराश हो गई तो खतरे में पड़ जाएगा जनतंत्र : विजय कुमार चौधरी

बिनोद कर्ण, सिमरिया/बेगूसराय : जिले के सिमरिया धाम स्थित तुलार्क महाकुंभ स्थली में शास्त्र मंथन के प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘पत्रकारिता का सामाजिक दायित्व’ विषय पर बहस दो धाराओं में बंटती नजर आयी. हालांकि दोनों धारा के लोगों ने सामाजिक दायित्व के बहाने पत्रकारिता पर मंडरा रहे खतरे को ही इंगित किया. विचारधारा का टकराव भी खुलकर सामने आया. संगोष्ठी के उद्घाटनकर्ता विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पत्रकारिता अगर निराश हो गई तो जनतंत्र खतरे में पड़ जाएगा.

मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा है उसे विधायिका, न्यायपालिका व कार्यपालिका पर नजर रखनी है. मीडिया ने बड़े-बड़े घोटाले को उजागर कर सरकार को कार्रवाई करने के लिए विवश किया. उसने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी किया है लेकिन हाल के वर्षों में मीडिया ने नकारात्मक पहलु को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है, इससे उसे बचाना चाहिए.

विधानसभा अध्यक्ष श्री चौधरी ने यह भी कहा कि मीडिया जगत को सकारात्मक पहलू को प्राथमिकता देनी चाहिए. ताकि समाज में अच्छा संदेश जाए और लोग उसका अनुकरण कर सके. उन्होंने कहा कि सामाजिक दायित्व से कोई अछूता नहीं है लेकिन मीडिया पर इसका दायित्व अधिक है. मीडिया इन दिनों नकारात्मक खबरों को प्रमुखता से लीड बना रहा है. जो दिखाया या छापा जाता है उसका लोग अनुकरण भी करते हैं. इस पहलू पर भी मीडिया को गौर करना चाहिए.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा का सत्र चल रहा था. एक ही दिन 180 विधायक ने रक्‍तदान किया और उसी दिन एक विधायक गंदा आचरण के कारण जेल गया. एक व्यक्ति के गंदे आचरण की खबर पहले पन्ने पर लीड बन गई और 180 विधायक के अच्छे आचरण की खबर पेज 8-9 पर 2 कालम में समेट दी गई. उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंदर कुछ विधायक हंगामा करते हैं तो पहले पन्ने की लीड बनती है. जबकि अच्छे वक्ता की बातें अंदर के पेज पर चली जाती है. खबरों की सुर्खी बनने के लिए भी हंगामा करने की प्रवृति इससे पैदा होती है. इसे मीडिया को ध्यान में रखना होगा.

उन्होंने कहा कि आजकल पहला पेज ढूंढना भी आसान नहीं रह गया है. जैकेट पेज की भी कोई सीमा नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि उनके पहल पर बिहार के पत्रकारिता में थोड़ा बदलाव आया है. अखबार अब उत्कृष्ट वक्ता का कालम शुरू किया है. जो विधायक अच्छा बोलते हैं उन्हें इस कालम में जगह मिलती है.

इससे पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख राजीव तुली ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि आज मीडिया को लेकर निराशा की स्थिति पैदा हो गई. मीडिया के समक्ष अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती है. मिशन की पत्रकारिता को कमीशन की पत्रकारिता मत बनाइए. टीवी व अखबार में जो दिखाया व छापा जाता है वही देश की सच्चाई नहीं है. दूरदर्शन के दर्शकों व अखबार के पाठकों का मंच होना चाहिए जो सप्ताह में बैठकर समीक्षा करें. जबतक समाज का अंकुश नहीं रहेगा तबतक टीआरपी बढ़ाने के लिए खबरों को ऐसे ही परोसा जाएगा.

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा कि पत्रकार का दायित्व है कि वे सरकार व सत्ता पर नजर रखे. जनता के हितों को सामने रखकर सच्चाई सामने लाये. लेकिन यहां वाल्मीकि को रत्नाकर व रत्नाकर को वाल्मीकि के रूप में पेश करने का काम शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि मैंने आदित्यनाथ योगी का इंटरव्यू लिया. जो सवाल थे वह किसी भी नेता से उसी तरह करता. लेकिन उस इंटरव्यू के कारण सोशल मीडिया पर जितनी गाली दी गई वह जायज है क्या.

उन्होंने पूछा कि क्या सामाजिक समरसता की बात नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गांव को सांसद ने गोद लिया या गांव के गोद में सांसद बैठ गए यह सवाल पूछा जाना चाहिए या नहीं. साढ़े 3 करोड़ शौचालय का निर्माण हुआ और वहां पानी का बूंद नहीं टपका या नहीं उसे उठाया जाए या नहीं. ताजमहल का मुद्दा उठा तो लाजिमी है कि लालकिला का मुद्दा भी उठेगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि नेताओं व पत्रकार में कोई अंतर नहीं रह गया है. सरकार की स्तुति व मानवाधिकार के नाम पर खबरों को मरोड़ना पत्रकारिता है क्या. एक जगह आप जाति छुपाते हैं तो दूसरी जगह जाति को उछालते हैं. किसी व्यवसाय के टर्नओवर व मुनाफा में अंतर नहीं समझते तो सौ करोड़ की नोटिस पर घबराते क्यों हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उछालते हैं तो लद्दाख का मुद्दा भी उठाइए.

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के राजस्व का माडल डिजाइन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के भाव कट जाएंगे तो पराभव तय है. डीडी1 के पत्रकार राजेश राज ने भी संबोधित किया. संचालन लोकसभा टीवी के श्याम सहाय ने संचालन किया. स्वागत भाषण कुंभ सेवा समिति के महासचिव सह विधान पार्षद रजनीश कुमार व धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष डॉ नलिनी रंजन ने किया. इस मौके पर अतिथियों को शॉल मोमेंटो व दिनकर की पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया. विजय कुमार चौधरी समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रजवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.

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