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मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

फास्ट फूड बच्चों को बना रहा है दिल का मरीज

भागलपुर [अशोक अनंत]। बदलती जीवनशैली का असर अब बड़ों पर ही नहीं बल्कि बच्चों की सेहत पर भी दिखने लगा है। फास्ट फूड का सेवन करने के कारण बच्चे हृदय रोग से पीड़ित होने लगे हैं। खासकर पांच वर्ष से लेकर 15 वर्ष के तक बच्चे इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) और शहर के निजी क्लीनिकों में ऐसे दर्जनों बच्चों का इलाज चल रहा है।

दरअसल, समय के साथ बच्चों के भी रहन-सहन व खान-पान में काफी परिवर्तन आया है। वे अब फास्ट फूड पर ज्यादा आश्रित हो गए हैं। जिसमें शामिल हानिकारक कैमिकल उन्हें बीमार बना रहा है। बच्चों के लिए सबसे खतरनाक कोल्ड ड्रिंक्स है। इतना ही नहीं खुले मैदान में खेलने-कूदने की जगह मोबाइल फोन पर घंटों गेम खेलना भी घातक साबित हो रहा है। खेल मैदान को छोड़कर मोबाइल पर ही क्रिकेट, फुटबॉल खेलने से शारीरिक श्रम नहीं हो पाता और बच्चे अल्प आयु में ही हृदय रोग के मरीज हो रहे हैं। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी स्वीकार किया है। डब्लूएचओ के मुताबिक देश में एक सौ बच्चों में से तीन हृदय रोग के मरीज हैं।

फास्ट फूड में उपयोग होने वाला तेल है खतरनाक

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक फास्ट फूड कोई खाना नहीं बल्कि रोग है। फास्ट फूड में तेल को बार-बार उबाला जाता है। इससे रौसिंड केमिकल में बदल जाता है जो कैंसर जनित है। बार-बार फास्ट फूड खाने से हृदय की धमनिया आपस में चिपक जाती हैं जिससे खून की नली बंद होने लगती है। इसके अलावा पैकेट बंद खाद्य सामग्री बिस्कुट, कुरकुरे आदि भी हानिकारक हैं। इन सामग्रियों में हाइड्रोजोनेटेट नामक केमिकल डाला जाता है ताकि खाद्य सामग्रियां खराब नहीं हों। इस केमिकल को डालने से छह माह तक खाद्य सामग्रियां खराब नहीं होतीं। लेकिन इन्हें खाने से हृदय की धमनियों को नुकसान होता है। इसके अलावा शारीरिक श्रम नहीं करने की वजह से भी हृदय रोग होने की संभावना है। डॉ. आशीष नवगछिया के राजेश कुमार, सुल्तानगंज के सुमन यादव सहित कई बच्चों का इलाज कर चुके हैं जिनमें हृदय रोग के लक्षण पाए गए हैं।

सर्दी-खांसी का इलाज न होने पर 20 वर्ष बाद भी हो जाता है हृदय रोग

डब्लूएचओ के मुताबिक देश में 100 में तीन बच्चे इससे पीड़ित हैं। सर्दी-खांसी होने पर इलाज नहीं कराने से हृदय प्रभावित होता है। 20 वर्षो के बाद हृदय रोग हो जाता है। जिन बच्चों का इलाज नहीं किया जाता उनका फीसद 100 में 50 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित हो जाते हैं। शिशु विभाग में आठ वर्षीय मोहद्दीनगर के जमशेद और 10 वर्ष की हुसैनाबाद की सकीना का इलाज किया जा रहा है।

गले में संक्रमण से भी होती है दिल की बीमारी

डॉ. मनीष कुमार के मुताबिक गले में संक्रमण स्टूप्टोकोकस बैक्टिरिया से होता है। तेज बुखार, पेट दर्द और लाल सूजा हुआ टॉन्सिल इसकी पहचान है। इलाज नहीं होने से संक्रमण तेजी से फैलता है और हृदय रोग होने की संभावना रहती है। इसके अलावा मोटापा भी हृदय रोग होने का कारण है। नाथनगर के 10 वर्षीय सूरज कुमार, लहेरी टोला की आठ वर्षीय अनिकेत आनंद सहित कई बच्चों का इलाज किया गया है।

हृदय रोग के लक्षण

-थकान होना

-सांस फूलना

-धड़कनें तेज होना

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ आरके सिन्हा के अनुसार फास्ट फूड व कोल्ड डि्रंक्स का सेवन बच्चों के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है। गंदगी के बीच रहने वाली घनी आबादी वाले क्षेत्र में पांच वर्ष के बच्चे रुमैटिक डिजीज से पीड़ित हो रहे हैं।

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