धन्यवाद

*** *** नवगछिया समाचार अब अपने विस्तारित स्वरूप "नव-बिहार समाचार" के रूप मे प्रसारित हो रहा है, आपके लगातार सहयोग से ही पाठकों की संख्या लगातार बढ़ते हुए 10 लाख को पार कर चुकी है,इसके लिए आपका धन्यवाद। *** नव-बिहार समाचार के इस चैनल में अपने संस्थान का विज्ञापन, शुभकामना संदेश इत्यादि के लिये संपर्क करें राजेश कानोडिया 9934070980 *** ***

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

क्या सच में बंद होने जा रही है एयरसेल, जान लीजिए इससे जुड़ी 5 बड़ी बातें

 नव-बिहार न्यूज नेटवर्क (NNN), नईदिल्ली। अब मुश्किल हालात में है 90 के दशक के आखिर में (1999) टेलिकॉम सेक्टर में एंट्री लेने वाली एयरसेल। यूजर्स दूसरे नेटवर्क में शिफ्ट हो रहे हैं तो कई नौकरी ढूंढने को मजबूर। कई महीनों से फंडिंग के लिए जूझ रही एयरसेल की मुश्किल दोतरफा है। एक ओर जहां उसके यूजर्स कॉल ड्रॉप एवं नो सिग्नल जैसी समस्याओं के लिए परेशान है, तो वहीं दूसरी तरफ कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच रही है। वहीं खबर यह भी है कि 31 मार्च तक कंपनी पर ताला भी लग सकता है। अगर आप भी एयरसेल के यूजर हैं या फिर पूर्व यूजर रह चुके हैं तो आपके लिए 5 बातें जानना जरूरी है।

क्या वाकई में बंद हो रही है एयरसेल?

इस मामले पर कंपनी का कहना है कि निकट भविष्य में फिलहाल तो ऐसा नहीं होने जा रहा है। फेसबुक और ट्विटर पर कई यूजर्स की ओर से कंपनी के बंद होने के डर को जाहिर किए जाने के बाद एयरसेल ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि वह अपनी सेवाएं बंद नहीं करने जा रही है और अगर ऐसा कुछ भी होता है तो उसके बारे में यूजर्स को पर्याप्त सूचना भी दी जाएगी। कपनी ने बताया, “हमारा सिस्टम ग्रोथ को संभालने में असमर्थ है। हालांकि हम कहीं नहीं जा रहे हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम आखिरी दम तक अपने कस्टमर्स की सेवा करें।”

एयरसेल के यूजर्स क्यों हो रहे हैं परेशान?

एयरसेल के तमाम यूजर्स अपने सर्कल में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। फेसबुक और ट्विटर पर वायरस हुईं कुछ पोस्ट के बाद से राजस्थान, कोलकाता, चेन्नई, ओडिशा और दिल्ली के यूजर्स को उनके मोबाइल पर कंपनी का नेटवर्क नहीं दिख रहा है। ऐसा पिछले कुछ दिनों से हो रहा है।

लोग दूसरे नेटवर्क में पोर्ट भी नहीं करा पा रहे हैं अपने नंबर्स, आखिर क्यों?

देशभर के 9 लाख एयरसेल कस्टमर्स ने बुधवार को और करीब 3 लाख कस्टमर्स ने मंगलवार को अपना नंबर दूसरे नेटवर्क पर पोर्ट कराने की कोशिश की, क्योंकि वो लगातार कॉल ड्रॉप की समस्या का सामना कर रहे थे। काफी सारे कस्टमर्स की ओर से पोर्ट की रिक्वेस्ट दिए जाने के बाद एयरसेल का बुनियादी ढांचा इस स्थिति को संभाले नहीं पा रहा है, इतना ही नहीं एयरसेल का तंत्र तेजी से बढ़ रही इस संख्या को संभालने में भी फिलहाल सक्षम नहीं रह गया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसे सभी पोर्ट रिक्वेस्ट को स्वीकार करने में थोड़ा समय लगेगा।

कब शुरू हुई समस्या?

एयरसेल ने 30 जनवरी को छह सर्कल में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया, इनमें गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल है। कंपनी ने तब कहा था कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल में काम करना अब मुश्किल हो रहा था। वहीं दूसरी ओर सितंबर 2017 में टेलिकॉम सेक्टर में हुई जियो की एंट्री ने कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दीं। जियो की एंट्री ने टेलिकॉम सेक्टर में बड़ी हलचल पैदा कर दी थी।

कंपनी बैंकरप्सी फाइलिंग पर क्यों कर रही है विचार?

जियो की एंट्री के बाद भारतीय टेलिकॉम उद्योग ने जिस उतार-चढ़ाव भरे माहौल का सामना किया उसे एयरसेल को बुरी तरह प्रभावित किया। जुलाई 2016 में 120 करोड़ रुपये के तिमाही परिचालन लाभ से, एयरसेल दिसंबर 2017 तक 120 करोड़ के परिलाचन नुकसान में आ गया। कंपनी, जो मौजूदा समय में एक वित्तीय संकट का सामना कर रही है, विकल्प तलाश रही है और उधारदाताओं सहित सभी हितधारकों से बात कर रही है ताकि आगे की संभावनाओं को पहचाना जा सके।

इसकी मूल कंपनी मैक्सिस पहले कंपनी के समर्थन के लिए कुछ पैसा निवेश करने की योजना बना रही थी, लेकिन अचानक उसने विचार त्याग दिया। 15,500 करोड़ रुपए के लोन को सुधारने के असफल प्रयास के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सर्कुलर ने एयरसेल को बैंकों के लिए गैर-निष्पादित संपत्ति बता दिया। इसी के कारण अब कंपनी अपने बैंक खातों के फ्रीज होने की समस्या से जूझ रहा है।


कोई टिप्पणी नहीं:

CURRENT NEWS

ताजा समाचार प्राप्त करने के लिये अपना ई मेल पता यहाँ नीचे दर्ज करें

संबन्धित समाचार

आभारनवगछिया समाचार आपका आभारी है। आपने इस साइट पर आकर अपना बहुमूल्य समय दिया। आपसे उम्मीद भी है कि जल्द ही पुनः इस साइट पर आपका आगमन होगा।

Translatore

आभार

नवगछिया समाचार में आपका स्वागत है| नवगछिया समाचार के लिए मील का पत्थर साबित हुआ 24 नवम्बर 2013 का दिन। यह वही दिन है जिस दिन नवगछिया अनुमंडल की स्थापना हुई थी 1972 में। यह वही दिन है जिस दिन आपके इस चहेते नवगछिया समाचार ई-पेपर के पाठकों की संख्या लगातार बढ़ कर दो लाख हो गयी। नवगछिया, भागलपुर के अलावा बिहार तथा भारत सहित 54 विभिन्न देशों में नवगछिया समाचार के लगातार बढ़ते पाठकों का बहुत बहुत आभार | जिनके असीम प्यार की बदौलत नवगछिया समाचार के लगातार बढ़ते पाठकों की संख्या 20 मई 2013 को एक लाख के पार हुई थी। जो 24 नवम्बर 2013 को दो लाख के पार हो गयी थी । अब छः लाख सत्तर हजार से भी ज्यादा है। मित्र तथा सहयोगियों अथवा साथियों को भी इस इन्टरनेट समाचार पत्र की जानकारी अवश्य दें | आप भी अपने क्षेत्र का समाचार मेल द्वारा naugachianews@gmail.com पर भेज सकते हैं।