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रविवार, 26 अप्रैल 2020

अक्षय तृतीया को दान का मिलने वाला फल नाश रहित होता है- स्वामी आगमानन्द


नव-बिहार समाचार। आज रविवार 26 अप्रैल को वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इसका शास्त्रों में अत्यंत महत्व है। भगवान नर नारायण हयग्रीव एवं परशुराम अवतार तथा त्रेता युग की शुरुआत एवं भगवान विष्णु के विशेष पूजन से जुड़े इस तिथि में दान का सर्वाधिक महत्त्व है। क्योंकि, इसमें दान से जो फल मिलता है, वह फल अक्षय अर्थात नाश रहित होता है। तात्पर्य है कि दान का फल यानि लाभ इस जीवन में और अगले जन्म में भी मिलता है। 
उपरोक्त बातें श्रीशिवशक्ति योगपीठ के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानन्द जी महाराज ने अक्षय तृतीया के मौके पर रविवार को स्वामी आगमानन्द परिवार नामक फेसबुक पेज के माध्यम से संदेश देते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के दानों में जल से भरे घड़े का दान विशेष महत्वपूर्ण है। क्योंकि, जल से जीवन तत्व का निर्माण होता है। ग्रीष्म काल में जल के अभाव में लोग प्राण छोड़ देते हैं। अतः समस्त जीवों के प्राण तत्व या जीवन तत्व की रक्षा के लिए जल या शर्बत का दान करना चाहिए या अधिक से अधिक लोगों को पिलाना चाहिए। यहां तक की पशु, पक्षी एवं अन्य छोटे-बड़े जीव भी जल के लिए व्याकुल होते हैं, और प्राण छोड़ देते हैं। अतः जीवों को भी जल दान करना चाहिए। 

उन्होंने यह भी बताया कि इस समय वैज्ञानिक विकास के असंतुलित रूप से प्रकृति भी असंतुलित हो रही है। परिणामस्वरूप संपूर्ण विश्व में जल संकट गहराता जा रहा है। जल संकट से बचने का कोई यंत्र नहीं बना। अपितु पेड़ पौधे यानी प्रकृति पर्यावरण रक्षण वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है। अतः सभी भक्तजन अपने अपने क्षेत्रों में जल या शरबत सेवा अधिक से अधिक लोगों को करें और करवाएं, अक्षय पुण्य का लाभ होगा, सब प्रकार से कल्याण होगा। कम से कम पूरे ग्रीष्म काल तक जल सेवा हर क्षेत्रों में करनी चाहिए। इसके अलावे इस दिन लोग जौ, गेहूं, चना, चावल, सत्तू आदि खाद्य वस्तुओं तथा स्वर्ण, गौ आदि दान करते हैं।

परमहंस स्वामी आगमानन्द जी महाराज ने यह भी बताया है कि अक्षय तृतीया एक ऐसा तिथि है, जिसमें व्यापार, विवाह, प्राण प्रतिष्ठा आदि किसी भी कार्य के लिए ग्रह, नक्षत्र, दिन, तिथि किसी भी प्रकार के योग के बिना भी अति शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस प्रकार के साल में 9 या 12 विशिष्ट मुहूर्त माने जाते हैं। इसी प्रकार अक्षय तृतीया का शास्त्रों एवं संतो ने भी काफी महत्व बताया है अतः सभी भक्तों को अनुपालन कर अपना अपना कल्याण अवश्य ही करना चाहिए। 

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